Wednesday, August 31, 2016

मौत चुग के ले जाएगी खुद बखुद

इंतज़ार न करो 
जिए जाओ बेफिक्र भरपूर
मौत चुग के ले जाएगी खुद बखुद



__Infinity

Tuesday, August 30, 2016

तेरे साथ की उम्मीद जोड़ देती है


हर बार
टूट के हो जाता हूँ चूर चूर बिछड़ के तुझ
से फिर से तेरे साथ की उम्मीद जोड़ देती है

__Infinity

खोद दो जड़े चाहे जितनी भी हमारी


खोद दो जड़े
चाहे जितनी भी हमारी
बरगद है
कहीं और जमा लेंगे

 __Infinity

देश बिक रहा है





देश बिक रहा है
तुम भी अपना हिस्सा बेंच दो  हुक्मराणों
हम तो तब भी फकीर थे
रहेंगे वही
हमारे हिस्से मे तो दो गज जमीन भी नहीं
गिरेंगे कहीं मिल जाएंगे मिट्टी मे
उगे थे जहां से
तुम अपने सोने वाले पंख लगा के
उड़ जाना फूलों के बाग की ओर

__Infinity

Wednesday, June 15, 2016

अच्छे मौसमों मे तो हर बात अच्छी होती है




तूफानो मे ही मांझी का पता चलता है
वरना अच्छे मौसमों मे तो हर बात अच्छी होती है

 __Infinity

Monday, June 13, 2016

रिश्ते की कशक बाँकी है

रिश्ते की कशक बाँकी है
गुजरना इधर से तो कर जाना वापिस


Infinity__

धरती माँ का गला दबा रहे है






सजीब पेड़ को काट कर
निर्जीव कंकरीट के जंगल बना रहे है
हर रोज एक किस्त
अपने धरती माँ का गला दबा रहे है


__Infinity

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Thursday, June 9, 2016

कोई खाने के लिए मरता है यहाँ कोई खा के मर जाता है








शर्ट के पवंदो में नजर आती है औकात हमारी
कोई खाने के लिए मरता है यहाँ कोई खा के मर जाता है

__Infinity

Wednesday, June 8, 2016

शर्ट के पेवंद में नजर आती है औकात हमारी

खर्च नाम का गुंडा हर महीने लूट लेता है इज्जत तनख्वा नाम की अवला की

__Infinity

खुशिओं से कीमती हो गया पैसा

खुशिओं से कीमती हो गया पैसा
हाय राम ये दिन दिखा रहा है जाने कैसा

__Infinity

Wednesday, June 1, 2016

सहंशाह हो गया मिल के तुझ से















मेरा वजूद तुझ से है 
तू है तो मैं कामिल हूँ
फकीर था  हुआ यू अब कि
सहंशाह हो गया मिल के तुझ से

__Infinity






Friday, May 27, 2016

आओ माँ तुम्हे लोरी सुना दूँ


























आओ माँ
तुम्हे लोरी सुना दूँ
जागती रही पूरी जिंदगी तुम
आओ थोड़ी के लिए तुम्हे भी सुला दू
हमें पालने में बूढ़ी हो गई हड्डियों की
थोड़ी थकान मिटा दू
उतना तो नहीं कर सकता
किया जितना तुमने
बस
थोड़ा सा ही सही
तुम्हे आराम दिला दूँ
दिन के अधिकतर हिस्से जो तुमने बिताये
संभालने में हमें समझी हर जरूरत हमारी
थोडा ही सही सुकून दिल दूँ
भागती रही हो पूरी जिंदगी
सबके लिए
आओ थोड़ा सा पैर दबा दूँ
आँखे थक गई होंगी तुम्हारी थोड़ी सी
रात देर तक जग कर
सुबह उठ कर सबसे पहले
आओ ना उन आँखों को
थोड़ी नींद दिला दूँ
मिट गई जो हांथो की लकीरे तुम्हारी
पेट भरने के लिए हमारी
आओ तुम्हारे लकीरो मे
किस्मत वाली रेखा को थोड़ा आगे बढ़ा दूँ
बर्तनों को चमकाने में जो बदरंग हो गई है
तुम्हारी हथेलियाँ
आओ न, थोडा सहला दूँ
देख हमें नय कपड़ो में
हो जाती थी खुश पेवंद भरी साड़ियों से
आओ चल के एक नयी साड़ी दिला दूं
सिर्फ हमें खुश रखने के लिए
जो रहती मुस्कान तुम्हारे होंठो पर
इंसान बन गए
बच्चे तुम्हारे
एहसास दिला के
चलो थोड़ी हसीं दिला दूँ
जिन उँगलियो को पकड़ के
बड़ा हुआ आओ
तुम्हारे मजबूत किए गए हांथ
पकड़ा कर थोड़ी दूर घूमा दूँ
आओ न माँ
तुम्हे लोरी सुना दूँ।


__Infinity

Monday, May 23, 2016

और तेरी याद आयी




आज फिर मौसम बदला 
तेरी याद आयी 
तुझ से अलग हो के 
जो गुम हो गई थी एक हंसी 
मेरे होंठो पर फिर एक बार आयी 


 __Infinity

Friday, May 13, 2016

परवाह करो तो लूट लेते है लोग

लापरवाही ही भली है ग़ालिब
परवाह करो तो लूट लेते है लोग ।।।

__Infinity

Thursday, May 12, 2016

हर जीत अब तुझ से जुड़ी है





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जिंदगी से कुछ ज्यादा ही जुड़ने लगा हूँ मैं
अब मेरी जिंदगी में शामिल है तू
​साँसो को संभाल के रखता हू अब मैं 
हक है इसपे तेरा मुझ से ज्यादा
तुझ ​पे हार जाऊँ सब अब यूँ कि
हर जीत अब तुझ से जुड़ी है 



__Infinity

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__
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मेरी जिंदगी का अधूरा पक्ष अब तुझ से ही पूरा होता है


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मेरी शाम सुबह है तुझसे अब
दिन रात तुझी से होता है
मेरी जिंदगी का अधूरा पक्ष
अब तुझ से ही पूरा होता है

__Infinity
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______________________________

Saturday, May 7, 2016

मेरे शब्द कब तेरे हो गए मालू

मेरे शब्द कब तेरे हो गए
मालूम नहीं
खुश था
अब खुशनशीब हो गया


__Infinity

मेरे शब्द चुरा के धनी हो गया कोई

मेरे शब्द चुरा के धनी हो गया कोई
मैं अपने नए शब्दों के साथ आमिर बना रहा

__Infinity

Thursday, May 5, 2016

आंसू भी बड़े समझदार हो गए है

आंसू भी बड़े समझदार हो गए है
निकलते है सोच समझ के आजकल।।।।

_Infinity

Tuesday, April 19, 2016

मखमल का विस्तर


मखमल का विस्तर
चुभता रहा रात भर
एक मजदूर सूखी रोटी खा के
सो गया फर्श पर सुकून से

__Infinity

Wednesday, March 30, 2016

मासूम बेईमानीयाँ

तेरी मासूम बेईमानीयाँ खूबसूरत है इतनी
हजार ईमानदार कुर्बान क्यूँ न करे हम ....

 __Infinity

ये बीमारी भी सोंच की ही मारी है

सोंच सोंच पे भरी है
 ये बीमारी भी सोंच की ही मारी है .....

 __Infinity

मासूमो के खू से प्यास नहीं बुझाते

शराब पीने वाले अच्छे होते है जनाव
 मासूमो के खू से प्यास नहीं बुझाते
खुद को जलाते है
और खुश भी हो लेते है बहुत ...

 __Infinity

Tuesday, March 29, 2016

आदतें

आदतें बहुत सी बदल दी हमनें
तंग जूतों की तरह काटने लग गई थी ....

__Infinity

Sunday, March 27, 2016

चाँद लेकर साथ मे अपने फिर से मिलने आऊँगा


एक बार फिर मैं तेरी रात चुराने आऊँगा
साथ साथ तेरे दिन को साथ घुमाने आऊँगा
दूर हो गया तो क्या फिर
चाँद लेकर साथ मे अपने 
फिर से मिलने आऊँगा ...
__Infinity

Tuesday, March 22, 2016

दीवारें बोलती है पेंट से अब यहाँ

दीवारें बोलती है पेंट से अब यहाँ
रिश्ते सारे चुप बहुत चुप है इस घर के अंदर ....

__Infinity

Sunday, March 20, 2016

भाई अब उसके स्कूल जाते है रोज


वो लड़की अकेली खेलती है घर के बर्तनो से अब 

भाई अब उसके स्कूल जाते है रोज ... 
 __Infinity

Tuesday, March 15, 2016

जिंदगी दौड़ती है अपने रफ़्तार से


जिंदगी दौड़ती है अपने रफ़्तार से 
बच्चे लगे है रोटी की जुगाड़ में
पेट तो भर लेते है खुद ही ये
बहुतो की रोटियां सिक जाती है इनके नाम से
__Infinity

बच्चे लगे है रोटी की जुगाड़ में⁠⁠⁠⁠


दुनिया लगी है चीखो-पुकार में
बच्चे लगे है रोटी की जुगाड़ में⁠⁠⁠⁠

__Infinity



Monday, March 14, 2016

सरहद कि रक्षा करने वाला कोई निर्जीव लौटा है

पड़ोस मे छाया है सन्नाटा
चुप रहो चुप रहो
कि सरहद कि रक्षा करने वाला
कोई निर्जीव लौटा है

__Infinity

कई किसान लटक जाते है फंदे से .





















बेमौसम बारिशों मे
जब चाय और पकौड़ो की सोचते हो तुम
कई किसान लटक जाते है फंदे से __Infinity

Sunday, March 13, 2016

Sunday, March 6, 2016

Saturday, March 5, 2016

कुछ नहीं बहुत कुछ नहीं सब कुछ

कुछ दिन पहले हुई है मुलाकात तुझसे
मिलेंगे तो बताएँगे कि क्या तू है मेरे लिए ।।।

__Infinity

आदतें

तेरे लिए छोड़ देते दुनिया हम भी
मैंने नहीं आदतों ने मांग लिया वक्त हमारा।।।

__Infinity...

ख्वाइशें

जिंदगी बीत गई शिकायतों में
कभी जान न पाये शिकायतों की खव्वाइस ।।।

__Infinity

मतलबी

यूँ है नहीं हुआ तुम्हारा सफ़र उम्दा
बहुत लोगो की हड्डियां गली है तेरे मंजिल के पीछे

__Infinity

पल

तेरा पल तेरे साथ ही था
मेरा मेरे साथ रहा
हुआ यूँ
कि तू बेवफा हुआ
और मैं हमनवा ही रहा

__Infinity

Friday, March 4, 2016

तेरा असर अब यूँ है हम पे




तेरा असर अब यूँ है हम पे
चेहरा सामने होता है तेरा हर एक हिचकी के बाद

Wednesday, February 24, 2016

फूक मार के उड़ा दिया

गर्दिशों मे हो गया गुमनाम कोई
उसने राख़ समझा
फूक मार के उड़ा दिया

__Infinity

Tuesday, January 26, 2016

कुछ तो खास है



















ये कौन ... कैसा एहसास है
आजकल जिंदगी मे कुछ तो खास है ...

Friday, January 22, 2016

उंगली पकड़ लो पापा

दहेज़ के लिए जहर पिला दी गई बेटी को
पिता ने बहा दिया नदी में
साथ साथ किनारे किनारे वो भी तैरता रहा
बेटी के साथ
साथ जहर उतार जाये
और उठ के बेटी फिर बुलाये
उंगली पकड़ लो पाप

__ Infinity

Monday, January 18, 2016

कर दो ताड़ ताड़ मुझे एक बार फिर






































पोत दो कालिख मेरे मुह पे
निकाल लो भड़ास अपनी
साफ चेहरा
मेरा बेदाग जिश्म
सहन नहीं होता तुम से
मेरा दर्द खुश कर जाती होगी तुम्हें
बहन माँ पत्नी लड़की सिर्फ अपनी होती है न
दूसरों की हो तो क्या सिर्फ जिश्म
नोच लो गिद्ध बन जाओ
निर्वश्त्र कर दो एक द्रोपादी को फिर से
कृष्ण नहीं आते आब
बस बचे है सिर्फ दुर्योधन और दुसशासन
नंगा कर देने के लिए सार्वजनिक
धृतराष्ट्र आज भी काबिज है यहाँ सिंहशसन पर
भीष्म की प्रतिज्ञ कर के बैठे है लोग सिर्फ खुद के लिए
गांधारी को भी आंखो पर बंधे कपड़ो के आगे नहीं दिखाता है कुछ
बेंच आई थी मुझे मेरे जैसे ही कोई
भरोषा कर के हाथ पकड़ लिए था जिसका मैंने
आओ
मेरा अधिकार नहीं है कुछ
और सारा कर्तव्य मेरा
डरते क्यू हो तुमसे तो गलती हो जाएगी
और सारे सवाल मेरे
आओ दागदार कर दो मुझे
क्यो मैं हो सिर्फ जिश्स्म
दर्द तो सिर्फ खुद को होती है
दूसरों को तो होता है बहाना
आओ कर दो ताड़ ताड़ मुझे एक बार फिर


__Infinity 

Saturday, January 16, 2016

किसी की इबादत क्यों करे कोई






















ये बच्चा करता है 
जूता पालिश
जीता है अपनी जिंदगी
किसी से शिकायत नहीं
किसी की इबादत क्यों करे कोई

Wednesday, January 6, 2016

तुझे तब भी करूंगा प्यार



























तुझे तब भी करूंगा प्यार
जब झुर्रियों से भर जाएगा तेरा चेहरा
और भी ज्यादा
जब तेरी आवाज नहीं रहेगी मीठी अब के जैसा
जब तू सीधी चल नहीं पाएगी तब भी
तुझे पकड़ कर सहारा दूँगा
मैं तब भी चाहूँगा तुझे उतना ही
जब हो जाएंगे तेरे सारे कपड़ो के साथ पोस्तीन ढीले
जब तू चल नहीं पाएगी तेज
मेरे कदम से कदम मिला के तब भी
उतना ही चाहूँगा तुझे
जब बैठे बैठे ऊँघेगी तू तब भी
उतना ही करूंगा प्यार
जब भूल जाओगी तुम बार बार
चाय मे चीनी
सब्जी मे नमक
तब भी करूंगा उतना ही प्यार
झड़ जाये बेशक तेरे सारे दांत
एड़ियाँ हो जाए चाहे कितनी भी खुश्क
फट जाये होठ तेरे चाहे
और भूरे हो जाए तेरे केस सारे
तब भी तुझे करूंगा उतना ही प्यार
तेरी अंतरआत्मा देखी है मैंने
जो कभी नहीं होगी पुरानी
बूढ़ी होगी नहीं कभी
हमेशा रहेगी नयी
बिलकुल तेरे आंखो मे बसी मेरे लिए बेचैनी की तरह
बार बार मुझे देख कर खुश होने वाले मन की तरह
तुझे अब की तरह तब भी करुंगा
बेंतहा प्यार .....

Tuesday, January 5, 2016

आब आई हो तो पास ही रहना






























सुबह की शबनम की तरह तेरी आँखों की चमक
शाम के गिरते अंधेरों की तरह जुल्फों की छाव
गुलाब की पंखुड़ी सा तेरी होठों का एहसास
बारह मास खिलने वाले फूलो सा तेरा ये मन
कहाँ से लाई हो ये किस जहां से उतर के आई हो
मेरी जहन मे थी एक तस्वीर
अक्स बनाता था हमेशा मन के जमींन पर
बिलकुल उसी की तरह नजर आती हो तुम
आब आई हो तो पास ही रहना
बुढ़ापा बिताएँगे साथ-साथ
एक दूसरे की उंगली थामे
कंधे संभाले
चलेगे साथ, सात जन्मो की राह पर एक साथ ही
इस जिंदगी के चुक जाने के बाद
अब जिंदगी के हर हिस्से पर
किसी और का भी हक है
कोई और भी चिंतित है
सोंचते है हम भी अब किसी और के लिए

__Infinity

Sunday, January 3, 2016

खुद को तेरी याद दिला लेते है

यू ही बैठे बैठे मुस्कुरा लेते है
खुद को तेरी याद दिला लेते है
वो तुझ से मिल के हुआ था एहसास
उसे बार बार खुद ही जगा लेते है

Sunday, December 27, 2015

घर पे बची है बूढी आँखे इंतज़ार में

छत पे कोई नहीं जाता अब खेलने
शोर करने
ऊपर जाती सीढ़ियों पर
जम गई है बहुत सारी धूल
कुछ बुजुर्ग कदम जाते है
अब ऊपर शाम को
निशान है पड़े है निरीह सीढियो पर पैरो के
जाते है  इंतज़ार करने
आता नहीं है कोई
शायद बेटे बहूँ बच्चे आ रहे होंगे इस रास्ते
या कोई बेटी मायका की तरफ निकली हो कहीं
घर में बचे है बुजुर्ग समय है जिनके पास बात करने की
एक दूसरे को देते है सांत्वना
चलो खुश होंगे बच्चे जहाँ है
समय मिलेगा तो आएंगे जरूर
फिर गूंजेगा छत सीढ़ी घर
बच्चों के शोर से
की बच्चे बड़े हो गए
और उड़ गए है घोसला छोड़ के
कुछ तलाशने कुछ पाने
घर में बूढी बची आँखे
इंतज़ार में है
की फिर हरे होंगे गमलो में सूखते हुए पौधे

___Infinity

Thursday, December 24, 2015

एक अजनबी











एक अजनबी 

एक अजनबी से यूँ मिले ...जैसे कोई पुराना सा था 
मस्तिष्क के किसी कोने में कोई  छुपा सा था 
कुछ अजब सी बात थी उनके आने की 
कुछ अनकहा कुछ अनसुना कुछ अनदेखा सा 
मन को ये ख्याल आया की इस से ही बंधा था शायद 
कुछ अजब गजब रिश्ता है सब सुलझा सब बंधा सा है 
एक खुला असमान एक अंतहीन आकाश सा .................
सुन्दर कुछ भाव... फूलों से भी कोमल एहसास 
एक अजनबी से यूँ मिले ........जैसे कोई पुराना सा था ..........

Wednesday, December 23, 2015

ये है नहीं प्यार तो है क्या और








ऐसे ही बैठे बैठे मुस्कराता कौन है 
यू हमे रात रात जागता कौन है 
हमारे अच्छे होने का एहसास दिलाता कौन है 
ये है नहीं प्यार तो है क्या और ... 

चाँद ला के दूँगा एक दिन तुझे







हो सकता है की कुछ रह जाए कमी फिलहाल
पर चाँद ला के दूँगा एक दिन तुझे
हो सकता है की दुनिया मे सबसे बड़ा न सही
पर एक दिन जरूर शाश्वत हो जाऊंगा तेरे लिए

बहोत दिन बाद ये बाहर आई है








बहोत दिन बाद ये बाहर आई है
एक सूखे पत्ते पे बहरो की खुमार आई है
ये एहसान तेरा ही है बस
की हर रोज हरा हो जाने का मन होता है अब

Friday, December 18, 2015

चाँद तो न दे पाएंगे







चाँद तो न दे पाएंगे ऐ हमहवा
देंगे एक छोटा था पौधा 
सींचना उसको जब आएंगे फूल उसपे
तो याद आएगी हमारी तुम्हें....

Sunday, December 13, 2015

जुड़ गया है कुछ ऐसे जैसे कभी जुड़ा नहीं






जुड़ गया है कुछ ऐसे जैसे कभी जुड़ा नहीं
मिल गया है शायद कोई अपना बहुत अपना ....

--Infinity

Tuesday, December 8, 2015

चिड़िया ने फिर बनाया है घोसला


























चिड़िया ने फिर बनाया है घोसला
उस खिड़की की बगल वाले पेड़ पर
कह देना जा कर उस इंसान को
कि काट न दे पेड़ की टहनियाँ फिर से
उसके लिए होगा सिर्फ एक घास-फूस का घोसला
किसी के लिए सारा जहां है वो

--Infinity

Friday, December 4, 2015

और बिन जिए, जिए चले जाते है

यू लोग कह देते है सांस लेने की फुर्सत नहीं
और बिन जिए, जिए चले जाते है ....

के पंछी मोहब्बत के निकल जाते है तारों के भी आगे

एक बार कर लो मोहब्बत हजूर
के पंछी मोहब्बत के निकल जाते है तारों के भी आगे

--Infinity

Sunday, November 29, 2015

तो कभी दिल भी रख लिया करो

दिल नहीं रख सकते तो कभी दिल भी रख लिया करो ...

_ Infinity

Monday, November 16, 2015

दायरा बड़ा हो तो दर्द भी बढ़ जाता है अक्सर




खुद को अब समेट लेते है बार बार
दायरा बड़ा हो तो दर्द भी बढ़ जाता है अक्सर

__Infinity

Saturday, October 31, 2015

खमखा मर गया बीच मे मोहब्बत बेचारा

तुम भी जिंदा रहे
और जीते रहे हम भी
खमखा मर गया
बीच मे मोहब्बत बेचारा ...

--Infinity

Thursday, October 29, 2015

एक गरीब के भूखे पेट का चिल्लाना







पैसे की मूक आवज हर कोई सुन लेता है यहाँ 
एक गरीब के भूखे पेट का चिल्लाना 
किसी के कानो तक जाता नहीं

--Infinity

Monday, October 19, 2015

कश्मीरी पंडितो के खून से लिखा गया था बर्बरता का इतिहास








कश्मीरी पंडितो के खून से 

लिखा गया था बर्बरता का इतिहास 

आज तक कुछ लोग  धर्मनिरपेक्षता की आड़ का 

रबड़ ले के घूम रहे है 

सबूत मिटाने के लिए ॥

Monday, October 5, 2015

क्या नेता जी

क्या नेता जी : आपको अपने महलों की खिड़कियों से भूखे पेट, गर्मी बरसात जाड़े मे जलते भिंगते ठिठुरते बदन नहीं नजर आते उन्होने ही तो अंगूठा लगा के भेजा था महल मे आपके?

--Infinity

Wednesday, September 30, 2015

वो तो दूर बैठे लेते है मजा चुपके चुपके

दंगे मे मरता है कौन हम या तुम, तुम या हम
वो तो दूर बैठे लेते है मजा चुपके चुपके
--Infinity

दंगे की आग पर अक्सर सेंकी जाती है नफ़रत की रोटियां

दंगे की आग पर अक्सर सेंकी जाती है नफ़रत की रोटियां
और भूखे लोग जल जाते है उसी आग में रोटी की आस में

--Infinity

आओ फिर वैसी ही दिवाली मनाए एक बार फिर मिट्टी के दीय जलाए ॥







आओ फिर वैसी ही दिवाली मनाए एक बार फिर मिट्टी के दीय जलाए ॥

  

Friday, September 18, 2015

मेरी यादो के भगवान हो तुम

तुम्हारे लिए मैं कुछ हूँ कि ना हूँ 
मेरे लिए सारा जहाँ हो तुम
याद आती नहीं होगी कभी मेरी तुझे
मेरी यादो के भगवान हो तुम
---Infinity

Friday, August 28, 2015

सिर्फ एक इंसान था वो

ना हिन्दू था न मुसलमान था वो
एक बूढ़ा भूखे पेट मर गया
सिर्फ एक इंसान था वो ॥

--- Infinity

कह तो दिया मैंने तुझे

कह तो दिया मैंने  तुझे
जो कहना था आखिर
समझना है जो भी समझ से फिर से एक बार
अब फुरसत नहीं समझने की ...


--- Infinity

जुगनू बीन लो इस काली अंधेरी रात की

जुगनू बीन लो इस काली अंधेरी रात की
की आएंगे काम आगे
ऐ हमसफर....

--- Infinity

दुनिया मे सबसे खूबसूरत हो

तुम मेरी हो गर तो दुनिया मे सबसे खूबसूरत हो
गर मेरी नहीं तो मुझे परवाह क्या है

-- Infinity

कुछ नया लिखे लेते भाई हमसे हमारा ही चुरा लिए तुमने

कुछ नया लिखे लेते भाई
हमसे हमारा ही चुरा लिए तुमने ...

--- Infinity

मुफ़लिशि है पर मजबूर नहीं ..

जिस्म हो क्यो न हो गई हो पुरानी
रूह अभी भी है ताजा ऐ गालिब
मुफ़लिशि है पर मजबूर नहीं ...

-- Infinity

इस मुफ़लीशी के काश मे

कितना भटके हम और
उस आसरे के आस मे
मिलतान नहीं कोई हमसफर
इस मुफ़लीशी के काश मे

--Infinity

हम भी तू नहीं

हमने तुझे आप कह दिया
तो यू न समझ नासमझ
हम भी तू नहीं ...

--Infinity

Thursday, August 27, 2015

Wednesday, August 26, 2015

Saturday, August 22, 2015

कहीं खुद को पहाड़ तो न समझ लिया तूने







कहीं खुद को पहाड़ तो न समझ लिया तूने
हम भी धशरथ माँजी है
तोड़ के रख देंगे और
बना लेंगे अपना रास्ता

---- Infinity

Saturday, August 1, 2015

मुझे मालूम नहीं कि वो हिन्दू कि मुस्लल्लम इमां था पर मालूम है जरूर कि वो अब्दुल कलाम था वो मैं भी उस की तरह होना चाहता रहा पर जा के बता दिया उसने की कुछ तो है या रह गई कमी हममे उसकी तरह होने के लिए।।।_Infinity

मुझे मालूम नहीं कि
वो हिन्दू कि मुस्लल्लम इमां था
पर मालूम है जरूर कि
वो अब्दुल कलाम था वो
मैं भी उस की तरह होना चाहता रहा
पर जा के बता दिया उसने की कुछ
तो है या रह गई कमी हममे
उसकी तरह होने के लिए।।।_Infinity

एक साबुन था कलाम साफ कर गया बहुतो को अपने झाग से _Infinity

एक साबुन था
कलाम साफ कर गया बहुतो को
अपने झाग से

_Infinity

जिसको जो चाहिये था मिला भरपूर

नशे में था दोनों ही
कलाम और याकूब
एक आवद करना चाहता था
एक बर्बाद देश को
दोनों को जो चाहिए था मिला
एक को आदर
एक को नफ़रत पुरे मुल्क का
जिसको जो चाहिये था मिला भरपूर

_Infinity 

Monday, July 27, 2015

ना हिन्दू न मुसलमान बन तू बनना है गर तुझे कुछ तो अब्दुल कलाम बन तू




ना हिन्दू न मुसलमान बन तू
बनना है गर तुझे कुछ तो
अब्दुल कलाम बन तू


--Infinity

Avul Pakir Jainulabdeen Abdul Kalam अवुल पकिर जाइनूलाब्दीन अब्दुल कलाम






यूं लगता है कोई सपना गया है
यूं लगता है कोई अपना गया है
मिला नहीं था कभी हमसे
फिर भी लगता है कोई हमनवां कोई अश्ना गया है

--Infinity

Thursday, July 23, 2015

न जाने गम छुपाने का हुनर किधर से ढूंढ लाता था वो

मूस्कुराता तो था
हँसता भी था ठहाकों मे
न जाने गम छुपाने का हुनर
किधर से ढूंढ लाता था वो .....

--Infinity

जब भी मिला मुसकुराता मिला तू मुझसे


जब भी मिला मुसकुराता मिला तू मुझसे
लगता था मेरे दिल से तेरा दिल ज्यादा भरा है ...
---Infinity

Saturday, July 11, 2015

भागते हुए जिंदिगी की राह की शाम हो गई

चलते फिरते
भागते हुए जिंदिगी की राह की शाम हो गई
फिर मिलते है कल सुबह एक नींद के बाद
--Infinity

Wednesday, July 8, 2015

यार समझते है कि शराफत आ गई हममे




जिंदगी के टेढ़े-मेढ़े रास्तो ने सीधा कर दिया हमे
यार समझते है कि शराफत आ गई हममे

-----Infinity

Tuesday, June 30, 2015

बड़े दरखातों को काट के गमलो मे पौधे लगा लिए







बड़े दरखातों को काट के
गमलो मे पौधे लगा लिए
जीते जागते पेड़ो का कत्ल कर
कंकरीट के जंगल बना लिए
भूख तो मिट जाती है दो रोटी से भी यारो
पर कागज बंडलों को दिल से लगा लिए
रोता रहा गरीब भूख से
और हमने ढकसोलों से पुण्य कमा लिए

--Infinity